menu
दंगों से लोकतंत्र तक: सियासत का ये कैसा नया चेहरा?
509
views
AIMIM ने दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को मुस्तफाबाद सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। क्या आप एक ऐसे नेता को चुनना चाहेंगे, जिसका अतीत दंगों और हिंसा से जुड़ा है? यह निर्णय आपका है, लेकिन यह आपके भविष्य ..................

"दंगों से लोकतंत्र तक: सियासत का ये कैसा नया चेहरा?"

जब लोकतंत्र का मंदिर राजनीति बन जाए और अपराध का प्रतीक नेतृत्व का चेहरा, तब सवाल उठाना लाजिमी हो जाता है। दिल्ली में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, और AIMIM ने दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को मुस्तफाबाद सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

यह वही ताहिर हुसैन हैं जिनका नाम 2020 के दिल्ली दंगों में मुख्य आरोपियों के रूप में सामने आया था। अदालत में चल रहे मामले और उनके विवादित अतीत के बावजूद उन्हें चुनावी टिकट मिलना क्या एक आम नागरिक के न्याय और सुरक्षा की गारंटी पर सवाल नहीं खड़े करता?

राजनीति या प्रायश्चित?
क्या यह फैसला किसी राजनीतिक पार्टी की ‘राजनीति’ का हिस्सा है, या दंगों में उजड़ी जिंदगियों के लिए मजाक? क्या ऐसे उम्मीदवार को मौका देना उन लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा नहीं है, जिन्होंने दंगों में अपना सबकुछ खो दिया?

जनता से सवाल
क्या एक लोकतांत्रिक देश में राजनीतिक पार्टियां ऐसे व्यक्तियों को टिकट देकर यह संदेश दे रही हैं कि अपराध और दंगों का हिस्सा होना नेतृत्व की सीढ़ी है? या यह केवल जाति, धर्म, और वोट बैंक की राजनीति का खेल बन चुका है?

सोचिए, समझिए, और निर्णय लीजिए।
यह सवाल सिर्फ AIMIM या ताहिर हुसैन का नहीं है, बल्कि पूरे देश के राजनीतिक चरित्र का है। आज अगर हम इसे नजरअंदाज करते हैं, तो कल यह हमारी सड़कों, हमारे घरों और हमारी सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

क्या आप एक ऐसे नेता को चुनना चाहेंगे, जिसका अतीत दंगों और हिंसा से जुड़ा है?
यह निर्णय आपका है, लेकिन यह आपके भविष्य को भी तय करेगा। सोचिए और समझिए – लोकतंत्र का भविष्य आपके हाथों में है।

Comments

https://www.local24x7news.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!